समाचार सच, चंपावत। सोमवार रात एक परिवार की खुशियां पल भर में उजड़ गईं। अपनी पत्नी और इकलौती बेटी के पास घर लौटे एक दंत चिकित्सक को शायद यह भी नहीं पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। हादसे के बाद जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे डॉक्टर को समय पर इलाज भी नसीब नहीं हो सका। दर्दनाक विडंबना यह रही कि उन्हें अस्पताल ले जा रही एंबुलेंस भी रास्ते में खराब हो गई।
मूल रूप से पिथौरागढ़ निवासी 40 वर्षीय डॉ. लोकेश जोशी लोहाघाट के बाड़ीगाड़ क्षेत्र में पत्नी डॉली जोशी और अपनी इकलौती बेटी के साथ किराए के मकान में रहते थे। सोमवार रात करीब नौ बजे वह रोज की तरह स्कूटी से घर पहुंचे। स्कूटी खड़ी करने के बाद जैसे ही कमरे की ओर बढ़े, अंधेरे और सुरक्षा रेलिंग के अभाव में उनका संतुलन बिगड़ गया और वह करीब 14 फीट गहरी खाई में जा गिरे।
घर के भीतर उनका इंतजार कर रही पत्नी को जब काफी देर तक उनके कदमों की आहट सुनाई नहीं दी तो वह बाहर निकलीं। तलाश शुरू हुई तो कुछ दूरी पर नदी किनारे घायल अवस्था में पड़े पति को देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग भी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद घायल डॉक्टर को बाहर निकाला गया। तत्काल 108 एंबुलेंस और पुलिस को सूचना दी गई।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुलिस मौके पर जल्द पहुंच गई, जबकि एंबुलेंस से घायल डॉक्टर को अस्पताल ले जाया जाने लगा। लेकिन रास्ते में एक और दुखद मोड़ सामने आया। गंभीर रूप से घायल डॉ. लोकेश को लेकर जा रही एंबुलेंस अस्पताल पहुंचने से पहले ही खराब हो गई। ऐसे में लोगों को उन्हें चादर में लपेटकर वैकल्पिक साधनों से अस्पताल पहुंचाना पड़ा।
जब तक डॉ. लोकेश अस्पताल पहुंचे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। एक बेटी के सिर से पिता का साया उठ गया और पत्नी की दुनिया उजड़ गई।
इस घटना ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत को सामने ला दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय पर बेहतर चिकित्सा सहायता और सुचारु एंबुलेंस सुविधा मिल जाती, तो शायद एक जिंदगी बचाई जा सकती थी। घटना के बाद क्षेत्र में शोक के साथ-साथ गहरा आक्रोश भी देखने को मिल रहा है।
लोगों ने एंबुलेंस सेवा की कार्यप्रणाली की उच्चस्तरीय जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि आपात स्थिति में खराब पड़ जाने वाली व्यवस्था किसी की भी जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
उप जिला अस्पताल लोहाघाट के सीएमएस डॉ. विराज राठी ने बताया कि अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉ. लोकेश की मृत्यु हो चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार सिर और सीने में गंभीर चोटें उनकी मौत का कारण बनीं। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस अस्पताल से लगभग 100 मीटर पहले खराब हुई थी।



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