Mitti ke bartan

मिट्टी के घड़े का पानी स्वास्थ्यवर्धक बताने के बहुत सारे कारण हैं

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। प्राचीन काल से मृद भांडों का प्रयोग किया जाता रहा है। किंतु कालांतर में भले ही इसका स्थान रेफ्रिजरेटर ने लेने का प्रयास किया है। किंतु फिर भी घड़े या सुराही का प्रयोग आज भी होता देखा गया है। चिकित्सकों या विशेषज्ञों की मानें तो कुम्हारों (कुम्भकारों) द्वारा बनाए गए घड़े (मटके) के लाभ ही लाभ है। मेडिकल सांइस भी मटके के पानी को उत्तम मानती है। नौतपा के समय जब सूर्य नारायण की उष्मा अपने चरम पर होती है। ऐसे में सभी के कंठ की पिपासा बुझाने और गले में तरावट देने के लिए के लिए हर गली और चौक-चौराहों पर देसी फ्रिज माने घड़े की मांग बढ़ गई है।
इसीलिए मुख्य चौराहों में, सड़क के किनारे, घड़ों का बाजार लगा हुआ है। कुछ सालों में इन घड़ों की मांग शहरी इलाके में कम हो गई थी मगर अब फिर से इसकी मांग होने लगी है।
क्योंकि कुछ धर्मात्मा प्रवृति के लोग मंदिर या चाक चौराहों में प्याऊ लगाते हैं जिसमें घड़े की ही सर्वाेत्तम भूमिका होती है। जो पानी पीने वाले को भीषड गर्मी में तरावट देने का काम करता है।
ये है पांच फायदे
1 – विशेषज्ञों के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में घड़े के पानी जितना ठंडा और तृप्ति का कारक होता है, स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही लाभकारी, गुणकारी होता है। इसका तापमान सामान्य से थोड़ा ही कम होता है जो ठंडक तो देता ही है, पाचन की क्रिया को बेहतर बनाने में मदद करता है।
2 – घड़े एवं सुराही का जल पीने से कैंसर के रोग का भय बहुत हद तक कम हो जाता है। घड़े का पानी गले से संबंधी बीमारियों से बचा कर रखता है और यह हमको जुकाम खांसी की परेशानी से भी बचाता है । बशर्ते की जल बहुत अधिक ठंडा ना हो।
3- घड़े एवं सुराही का शीतल जल ग्रहण करने से पीएच संतुलन सही होता है। मिट्टी के क्षारीय तत्व और जल के तत्व मिलकर उचित पीएच संतुलन बनाते हैं जो शरीर को किसी भी तरह की हानि से बचाते हैं और संतुलन बनाए रखते हैं।
4- घड़े या सुराही का जल प्राकृतिक रुप से शीतल होता है, जबकि फ्रिज का पानी इलेक्ट्रिसिटी की सहायता से शीतल होता है जिसका नकारात्मक प्रभाव हमारे शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता के गिरते स्तर के रुप में चुकानी पड़ती है। घड़े या सुराही का जल का एक लाभ बिजली के बिल में भी कटौती करता है।
5- यदि आप दमा के रोगी हैं, तो भी घड़े या सुराही का शीतल जल पिएं। लकवा के रोगी को भी घड़े का जल नियमित तरीके से गर्मी में पीना चाहिए। इससे उनको फायदा मिलेगा।

  1. घड़े में मृदा के संपूर्ण गुण भी होते हैं जो जल की अशुिद्धयों को दूर करते हैं और लाभकारी खनिज लवण (मिनरल्स) प्रदान करते हैं। घड़े के पानी के निरंतर प्रयोग से शरीर से विषैले तत्व स्वतः बाहर निकल जाते हैं। साथ ही प्रतिरोधात्मक क्षमता को मजबूत बनाने में यह पानी लाभकारी होता है।
  2. घड़े एवं सुराही का जल ना केवल शीतलता से समृद्ध होता है अपितु प्रदूषण से भी मुक्त होता है।
  3. ग्रीष्मकाल में लोग रेफ्रिजरेटर का या बर्फ का पानी पीते है, ये गुण में गर्म होती है। परिणामस्वरूप यह वात भी बढ़ाता है। अत्यधिक शीतल जल का प्रयोग से कब्ज हो जाती है तथा प्रायः गला खराब हो जाता है।
    इसके विपरीत घड़े का जल अत्यधिक ठंडा ना होने से वात नहीं बढ़ाता, इसके जल से संतुष्टि और तरावट मिलती है। घड़े को रंगने के लिए गेरू का इस्तेमाल होता है जो गर्मी में शीतलता प्रदान करता है। मटके के पानी से कब्ज, गला ख़राब होना आदि रोगों से रक्षा होती हैं।
    मिटटी में शुद्धि करने का गुण होता है यह सभी विषैले पदार्थ सोख लेती है तथा पानी में सभी जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्व मिलाती है। बैड बैक्टीरिया को नष्ट कर गुड बैक्टीरिया में वृद्धि कर जल में आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व सवतः ही मिश्रित होती है।
    -घड़े में रखा जल तापमान संतुलित रखता है
    -ना बहुत अधिक शीतल ना ही गर्म।

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