देवशयनी एकादशी व्रत कब है और चातुर्मास में किन नियमों का पालन किया जाता है

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समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है। चातुर्मास के चार महीने भगवान विष्णु योग निद्रा में रहते हैं और इस दौरान सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं। चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से होती है। देवशयनी एकादशी आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष में आती है। चातुर्मास के दौरान शुभ कार्यों पर विराम लग जाती है। इन चार महीनों में भोजन, शयन और ब्रह्मचर्य से जुड़े कठिन नियमों का पालन किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान अधिक से अधिक जप और तप करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास में व्रत नियमों का पालन करने से जीवन में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है। आइए जानते हैं कि देवशयनी एकादशी व्रत कब है और चातुर्मास में किन नियमों का पालन किया जाता है।

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जुलाई में देवशयनी एकादशी कब है
हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी व्रत रखा जाता है। आषाढ़ शुक्ल एकादशी तिथि 24 जुलाई 2026 को सुबह 05 बजकर 42 मिनट पर प्रारंभ होगी और 25 जुलाई 2026 को सुबह 08 बजकर 04 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि में देवशयनी एकादशी 25 जुलाई, शनिवार को रखा जाएगा।

चातुर्मास में किन नियमों का पालन करना चाहिए
किस महीने किन चीजों का किया जाता है त्याग

चातुर्मास के चार महीने सात्विक भोजन, ब्रह्मचर्य का पालन, भूमि पर सोना और भगवान विष्णु की आराधना का नियम होता है। इस दौरान हर महीने एक-एक वस्तु का त्याग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चातुर्मास के पहले महीने श्रावण में हरी पत्तेदार सब्जियों का त्याग, भाद्रपद मास में दही और छाछ का त्याग, आश्विन मास में दूध का त्याग (लेकिन भगवान विष्णु का प्रसाद चरणामृत का सेवन किया जा सकता है) और कार्तिक माह में काली उड़द की दाल और उससे बने भोजन का त्याग किया जाता है।

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शुभ कार्यों की मनाही
चातुर्मास के दौरान शादी-ब्याह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे शुभ कार्यों की मनाही होती है। इस दौरान किसी नए काम की शुरुआत नहीं करनी चाहिए। चातुर्मास में पेड़-पौधे काटने और जमीन खोदने से बचना चाहिए।

ब्रह्मचर्य का पालन
चातुर्मास के चार महीने भूमि पर शयन (सोना) चाहिए। इस दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करना अनिवार्य होता है। इन चार महीनों में सात्विक भोजन की ग्रहण करना चाहिए। चातुर्मास में लहसुन, प्याज और मास-मदिरा का सेवन वर्जित है।

भगवान विष्णु और भगवान शिव का अधिक से अधिक ध्यान

चातुर्मास के चार महीने भगवान विष्णु और भगवान शिव का अधिक से अधिक ध्यान लगाना चाहिए। इस दौरान ‘ऊँ नमो भगवते वासुदेवायश् या ऊँ नमः शिवाय मंत्र का जाप करना बहुत पुण्यकारी माना जाता है।

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