जिन्होंने हमारे सुरक्षित आज के लिए अपना कल न्योछावर कर दिया…

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समाचार सच, हल्द्वानी। समाचार सच अपने पाठकों को समय-समय पर देश के लिए जान देने वाले अमर बलिदानियों व उनके परिवारों से अवगत कराता रहता है। इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं अमर बलिदानी सिपाही जगत सिंह, नायक भगवान सिंह और नायक मोहन सिंह के बारे में। इन्होंने हम सब के लिए इसी महीने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था।

सिपाही जगत सिंह: मूल रुप से जनपद बागेश्वर के ग्राम सलिंग भराणी निवासी पूर्व सैनिक लाल सिंह और जानकी देवी के सबसे बड़े बेटे जगत सिंह का जन्म 10 अगस्त 1983 को हुआ। पूर्व सैनिक लाल सिंह सेवानिवृति के बाद मूल गांव छोड़कर 1988 में बिन्दुखत्ता में आकर बस गये। जगत सिंह ने प्रारंभिक शिक्षा कालिका मंदिर बिन्दुखत्ता से करने के बाद कक्षा 12 शान्तिपुरी से उत्तीर्ण की। कक्षा 12 का परीक्षाफल आने से एक दिन पहले ही जगत सिंह का चयन सेना में हो गया और 10 सितम्बर को उन्होंने कुमांऊ रेजिमेण्ट केन्द्र में प्रशिक्षण के लिए रिर्पोट की। प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद जगत सिंह को 18 कुमांऊ में स्थानांतरित किया गया। उस समय उनकी पल्टन विश्व के सबसे ऊँचे लड़ाई के मैदान सियाचिन में तैनात थी। दिनांक 05 जून 2003 को पाकिस्तानी सेना द्वारा जबरदस्त गोलाबारी की गई जिसमें सिपाही जगत सिंह शहीद हो गये।

नायक भगवान सिंह: नायक भगवान सिंह का जन्म 20 जून 1971 को पिथौरागढ़ में हुआ। इनके पिताजी का नाम श्री त्रिलोक सिंह और माता जी का नाम श्री देवकी देवी था। पिथौरागढ़ से इंटर की परीक्षा पास करते ही 28 दिसंबर 1990 को रुड़की में बंगाल इंजीनियर ग्रुप में भर्ती हो गए। 1997 में इनकी शादी श्रीमती इंदिरा देवी से संपन्न हुई। इनकी एक पुत्री और एक पुत्र हैं। दिनांक 7 जून 2002 को ऑपरेशन पराक्रम के दौरान मातृभूमि की रक्षा के लिए उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दिया। इनके बलिदान के समय इनकी पुत्री पूजा 2 वर्ष की और बेटा बलवंत मात्र 3 महीने का था। बलवंत वर्तमान में कॉलेज से पढ़ाई कर रहे हैं और उम्र नहीं होने के कारण सेना में अभी नहीं जा पाए हैं। लेकिन उनका कहना है कि वे भी सेना में जाकर ही मातृभूमि की रक्षा करेंगे।

नायक मोहन सिंह: मूल रुप से ग्राम किमोली, काण्डा जिला बागेश्वर निवासी पूर्व सैनिक केशर सिंह और श्रीमती लक्ष्मी देवी के पांच पुत्रों में से चार पुत्र भारतीय सेना में मातृभूमि की रक्षा के लिए गये। पूर्व सैनिक केशर सिंह के पुत्र मोहन सिंह का जन्म दिनांक 15 मार्च 1966 को हुआ। कक्षा 10 पास करते ही मोहन सिंह कुमांऊ रेजिमेण्ट में भर्ती हो गये और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें 3 कुमांऊ में स्थानांतरित किया गया। 1999 में जब ऑपरेशन विजय चरम पर था तो उस दौरान नायक मोहन सिंह शहीद हो गये। वर्तमान में उनकी वीर नारी श्रीमती जानकी देवी अपने पुत्र व पुत्री के साथ हल्द्वानी में निवास करती हैं।

पूर्व सैनिक लीग  के जिला अध्यक्ष मेजर बी एस रौतेला ने बताया कि नायक मोहन सिंह के नाम पर उनके पैतृक गांव के मोटर मार्ग का नाम शहीद नायक मोहन सिंह मार्ग तथा हल्द्वानी में जिस कॉलोनी में उनकी वीर नारी निवास करती है उस कॉलोनी के निवासियों ने नायक मोहन सिंह के बलिदान को चिरस्मरणीय बनाने और सम्मान देने के लिए कॉलोनी का नाम भी उनके नाम से रखा है।

समाचार सच परिवार शहीद सिपाही जगत सिंह, शहीद नायक भगवान सिंह और शहीद नायक मोहन सिंह की शहादत को सलाम करता है और उनको नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

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