सर्दियों में अस्थमा मरीजों को रहता है अटैक का खतरा, इन घरेलू उपचार से करें बचाव!

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। सर्दियों में बदलते मौसम और सूखी हवा के कारण अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान शुष्क और ठंडी हवा के कारण मांसपेशियों में भी ऐंठन पैदा होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में अस्घ्थमा रोगी के सांस की नली में सूजन आ जाती है, इसलिए उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है।
सर्दियों की शुरुआत होते ही कई लोगों के लिए बड़ी मुसीबत खड़ी हो जाती हैं। जहां कुछ लोग सर्दी-जुकाम के शिकार हो जाते हैं तो वहीं कुछ लोगों का पुराना सा पुराना चोट का दर्द उठ जाता है। जबकि अस्थमा के रोगियों के लिए तो यह सर्दी एक आफत बन जाती है। सर्दियों में अस्थमा रोगियों के लिए अटैक का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। उन्हें सांस लेने में दिक्कत और खासी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
सर्दियों में बदलते मौसम और सूखी हवा के कारण अस्थमा की समस्या बढ़ जाती है। इस दौरान शुष्क और ठंडी हवा के कारण मांसपेशियों में भी ऐंठन पैदा होने लगती है। चिकित्सकों के अनुसार सर्दियों में अस्घ्थमा रोगी के सांस की नली में सूजन आ जाती है, इसलिए उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि सर्दी का मौसम अस्थमा के मरीजों के लिए अच्छा नहीं होता है। इस दौरान उन्हें अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए कुछ उपाय और अपना खास ख्याल रखना चाहिए। आज हम आपको अस्थमा (दमा) के प्रकार और इसके सर्दियों में बढ़ने वाली समस्या को कम करने के उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं, आइए जानते हैं…
दो प्रकार का होता है अस्थमा
आपको बता दें कि अस्थमा या दमा 2 प्रकार के होते हैं। पहला- बाहरी अस्थमा और दूसरा- आंतरिक अस्थमा होता है। बाहरी अस्थमा होने का कारण बाहरी एलर्जी है, जैसे- पालतू जानवरों के बाल, धूल के कण और घर में जमी फफूंद आदि। वहीं, आंतरिक अस्थमा होने का कारण हमारे द्वारा ली गई घातक केमिकल तत्वों वाली सांस होती है। जैसे- स्मोकिंग का धुआं, प्रदूषण की हवा और किसी चीज के जलने का धुआं।
सर्दियों में अस्थमा को नियंत्रण में रखने के लिए अपनाएं यह उपाय-
बार-बार हाथ धोएं

अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से जरूर धोएं। इस तरह से कीटाणुओं के फैलने की संभावना को कम किया जा सकता है। आप चाहें तो हैंड सेनिटाइजर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने घर के बच्चों और अन्य सदस्यों को भी हाथ धोने के लिए कहें, इससे घर में फैलने से बचाव हो सकेगा।
मुंह बंद रखें
अगर आप अस्थमा रोगी हैं तो आपके लिए अच्छा रहेगा कि आप अपने मुंह पर मास्क या कपड़ा लगाएं। मुंह को बंद रखना फेफड़ों के लिए काफी अच्छा रहता है। हमारी नाक में इतनी क्षमता होती है कि वो सांस लेने वाली हवा को फेफड़ों में गर्माहट दे सकती है।
आग वाली जगह पर बैठने से बचें
भले ही आग के पास बैठकर सर्दियों में गर्माहट मिलती हो लेकिन अस्थमा रोगियों के लिए ये काफी घातक साबित हो सकती हैं। शोध में पाया गया है कि अस्थमा के रोगियों के लिए जलता हुआ तंबाकू और लकड़ी एक जैसा ही होता है। आग से आने वाले धुएं से फेफड़ों में परेशानी हो सकती है। यह अस्थमा मरीजों के लिए खतरनाक हो सकता है।
घर में ही करें एक्सरसाइज
सर्दियों में बहुत कम तापमान और खूब ठंडी हवा चलना आम बात है। ऐसे में अस्थमा रोगियों के लिए घर में ही रहना सही है। अगर आप अस्थमा मरीज है और एक्सरसाइज या योग करने के लिए जिम या पार्क में जाते हैं तो आपको बता दें कि ये आपके लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए सर्दियों में घर में ही एक्सरसाइज करें।
अस्थमा का घरेलू उपचार

  • हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें, आपके लिए पालक और गाजर का रस फायदेमंद रहेगा।
  • अदरक, लहसुन, काली मिर्च और हल्दी को अपने आहार में जरूर शामिल करें, यह सर्दियों में अस्थमा से लड़ने में मदद करते हैं।
  • आपको पुराने चावल, कुल्थी की दाल, गेहूं, जौ, मूंग और पटोल का सेवन करना चाहिए।
  • गुनगुने पानी का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें, ये सर्दियों में आपके लिए काफी फायदेमंद रहेगा।
  • अस्थमा रोगियों को शहद का सेवन करना चाहिए।
    इन बातों का रखें ख्याल
  • बाहर का खाना न खाएं।
  • धूम्रपान वाले स्थान पर न खड़े होएं।
  • घर से निकलते समय मास्क या स्कार्फ जरूर लगाएं।
  • सर्दियों में ज्यादा भीड़भाड़ और प्रदूषण वाले जगहों पर जाने से बचे।
  • सर्दियों में संतरे, चुकंदर, नींबू, पालक और मसूर की दाल का ज्यादा सेवन करें।का सेवन करते हैं, तो ऐसे में आपके शरीर में पानी की तेजी से कमी हो सकती है। जिससे आप डिहाईड्रेशन के शिकार हो सकते हैं और आंखों के नीचे सूजन को नींद पूरी होने के बाद भी महसूस करेगें। ऐसे में नमक का सेवन कम करें और पानी की मात्रा को बढ़ा दें। आमतौर पर माना जाता है कि कैफीन युक्त पदार्थ यानि काफी पीने की आदत आपको फ्रेश रखने में मदद करती हैं, लेकिन ये बात पूरी तरह से सही नहीं है, क्योंकि अत्याधिक काफी पीने से शरीर में तेजी से पानी की कमी होती है जिससे शरीर और चेहरा, आंखें 8 घंटे की नींद के बाद भी थकी हुई नजर आती हैं। अगर आप इस समस्या को लंबें समय तक महसूस करते हैं, तो ऐसे में अपनी काफी पीने की आदत को सीमित करें और पानी के अलावा अन्य तरल पदार्थों का सेवन बढ़ा दें।
    धूल, धुएं से होने वाली एलर्जी भी आंखों में सूजन और थका हुआ दिखाने का अहम कारण है। क्योंकि कई बार धूल के छोटे छोटे कण आंखों में चले जाते हैं, जिससे हमारे शरीर में हिस्टामाइन नामक रसायन उत्पन्न होता है जिससे आंखों में मौजूद ब्लड वेसेल्स में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है और सूजन का कारण बनता है।
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