मौत का दस्तावेज: कोह-ए-नूर

खबर शेयर करें

समाचार सच. अध्यात्म डेस्क। भागवत पुराण के अनुसार द्वारिका के एक नागरिक सत्राजित के पास स्यमंतक मणि थी। कृष्ण ने उसे राजा उग्रसेन के पास पहुंचाने को कहा, किन्तु सत्राजित इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उसका भाई प्रसेनजित मणि को हमेसा छाती से चिपकाए रहता था। एक दिन सिंह ने प्रसेनजित को मारकर मणि छीन ली। सिंह को रीछ ने मारकर मणि कब्जा ली। कृष्ण ने रीछ को मारकर मणि हथिया ली। मणि को पाकर कृष्ण चैन से न बैठ सके और बहेलिया ने उन्हें मार दिया। इसके बाद स्यमंतक मणि पाण्डववंशियों के पास पहुंची। परीक्षित, जन्मेजय, चन्द्रगुप्त मौर्य, विम्बसार, अशोक, बृहदरथ, पुष्यमित्र-एक के बाद एक के पास मणि पहुंचने की कथाएं कष्टकर हैं। हस्तान्तरण, शान्ति और सद्भावना नहीं, दुरभिसंधियां और हत्याएं मणि को इधर-उधर लिए फिरीं। कनिष्क, चन्द्रगुप्त, हर्षवर्धन के बाद मणि मालवा नरेश यशोवर्मा के पास पंहुचती है। (साभार: शक्तिप्रसाद सकलानी)

ADVERTISEMENTS
यह भी पढ़ें -   जन्माष्टमी 2026: कौन सी वस्तुओं के दान करने से जातक की मनोकामना पूर्ण होती है और जीवन में धन-धान्य बढ़ता है
Ad Ad Ad

सबसे पहले ख़बरें पाने के लिए -

👉 हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ें

👉 फेसबुक पर जुड़ने हेतु पेज़ लाइक करें

👉 यूट्यूब चैनल सबस्क्राइब करें

हमसे संपर्क करने/विज्ञापन देने हेतु संपर्क करें - +91 70170 85440