आयुर्वेद के इन रामबाण नुस्खों को अपनाएं और स्वस्थ जीवन की तरफ बढ़ाएं कदम

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। अगर ज़िन्दगी भर हेल्दी रहना चाहते हैं तो आयुर्वेद के इन दस हेल्थ टिप्स को हमेशा याद रखें। ये टिप्स जितने आसान हैं, उतने ही असरदार भी हैं।

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  1. आयुर्वेद का कहना है कि हमेशा सुबह उठकर एक गिलास गर्म या गुनगुना पानी अवश्य पिएँ। खाली पेट पानी पीना आपकी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद है।
  2. आयुर्वेद के अनुसार आपको न ज़्यादा खाना चाहिए न कम। खाना इतनी मात्रा में होना चाहिए कि खाना खाने के बाद आपका पेट आधा ठोस आहार यानी सॉलिड फ़ूड से भरा होना चाहिए, एक चौथाई तरल से भरा होना चाहिए और एक चौथाई खाली होना चाहिए।
  3. आपके दो मील्स के दौरान लगभग चार से पांच घंटे का अंतराल होना चाहिए। जैसे नाश्ते के बाद चार से पांच घंटे बाद ही दोपहर का भोजन हो तो सेहत के लिए अच्छा है।
  4. आपके शरीर की कम से कम एक बार हफ्ते में आयुर्वेदिक तेल से मालिश होनी चाहिए। नियमित रूप से शरीर की तेल मालिश से न सिर्फ आपका तनाव कम होता है बल्कि आपका मूड बेहतर होता है और आपकी सेहत अच्छी रहती है।
  5. एक हफ्ते में कम से कम दो से तीन दिन व्यायाम करना स्वस्थ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  6. खाते समय आप सिर्फ खाने पर ध्यान दें। उन चीज़ों से दूर रहें जिनसे आपका ध्यान खाने से हटेगा जैसे टीवी, इंटरनेट या मोबाइल।
  7. अपनी प्रकृति और दोष को समझ कर अपनी जीवनशैली में ऐसे बदलाव लाएं जो आपकी प्रकृति और दोषानुसार हों। जैसे वात दोष वाले लोग प्रकृति से अनियमित होते हैं इसलिए उन्हें एक नियमित रूटीन का पालन करना चाहिए।
  8. अपनी प्रकृति और दोष के हिसाब से खाना खाएं। जैसे वात प्रकृति वाले लोगों को गर्म, पका हुआ भोजन करना चाहिए, डेयरी उत्पादों का सेवन करना चाहिए, फूल गोभी, ब्रोकोली, बीन्स जैसी सब्ज़ियों का सेवन करना चाहिए।
    उसी तरह पित्त दोष वाले लोगों को तले हुए और मसालेदार भोजन से बचना चाहिए। आम, चेरी, खरबूजे जैसे फलों का सेवन करना चाहिए।
    कफ दोष वाले लोगों को हल्का, गर्म और मसालेदार भोजन खाना चाहिए। भोजन को अदरक, जीरा, काली मिर्च, तिल, हल्दी आदि के साथ मसालेदार बनाना चाहिए। सेब, नाशपाती, आड़ू, अंजीर और अनार जैसे फलों का सेवन करना चाहिए।
  9. बर्फ जैसे ठन्डे पानी को पीने से बचना चाहिए, ख़ास तौर से खाने से पहले, खाने के दौरान या खाने के बाद।
  10. अपना एक दैनिक रूटीन बनाना चाहिए और उसका नियमित रूप से पालन करना चाहिए। यह स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत ज़रूरी है।
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