चौथे विधानसभा चुनाव में पार्टी को नहीं मिली एक भी सीट
हल्द्वानी (धीरेन्द्र भट्ट)। राज्य विधानसभा के पहले और दूसरे विधानसभा चुनाव में बसपा नेे अपने बलबूते दमदार प्रदर्शन किया था। पहले चुनाव में पार्टी ने ससत और दूसरे चुनाव में पार्टी ने आठ सीटें जीती थी। वहीं तीसरे विधानसभा चुनावों में पार्टी तीन और चौथे विधानसभा चुनाव में पार्टी का राज्य से सूपड़ा ही साफ हो गया।
ज्ञात हो कि कभी बसपा को उत्तराखंड में तीसरी सियासी ताकत माना गया था लेकिन तीसरे विधानसभा चुनावों के बाद से ही पार्टी का प्रदर्शन गिरने लगा और अगले चुनाव में वह जीरो पर ही सिमट गयी। हरिद्वार और उधमसिंह नगर में मजबूत मानी जाने वाली बसपा चारों खाने चित हो गई। वहीं पार्टी के सबसे मजबूत नेता माने जाने वाले सरवत करीम अंसारी भी अपने ही गढ़ मंगलौर से चुनाव हार गये।
राज्य गठन के बाद बसपा 2002 के पहले विधानसभा चुनावों में सात सीटों पर विजयी हुई। हरिद्वार और उधमसिंह नगर में बसपा को बड़ी सफलता मिली। इन्हीं दो जिलों में बसपा ने जनाधार बढ़ाने की दृष्टि से फोकस किया। वहीं 2007 के विधानसभा चुनाव में बसपा की सीटें बढ़कर आठ हो गईं। 2012 के चुनाव में बसपा को अपेक्षित सफलता नहीं मिली और पार्टी हरिद्वार तक ही सिमट कर रह गई। हरिद्वार से पार्टी के तीन विधायक जीतकर आए, लेकिन बाद में दो विधायक बसपा से निष्कासित कर दिये गया। हालाकि चौथे विधानसभा चुनावों के दौरान बसपा को विधायकों की संख्या बढ़ने की अपेक्षा थी और सभी सीटों पर बसपा ने प्रत्याशी भी उतारे थे। लेकिन, बसपा एक भी सीट पर खाता नहीं खोल पायी। इसके अंदाजा लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड की सियासत कांग्रेस और भाजपा के इर्दगिर्द की निकट भविष्य में रहने वाली है।
उत्तराखंड के विधानसभा चुनावोें में बसपा का ग्राफ
2002 2007 2012 2017
इकबालपुर इकबालपुर मंगलौर खाता नहीं
पंतनगर-गदरपुर पंतनगर-गदरपुर झबरेड़ा खुला
लालढांग लालढांग भगवानपुर
बहादराबाद बहादराबाद
मंगलौर मंगलौर
लन्ढौरा लन्ढौरा
सितारगंज सितारगंज
भगवानपुर



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