समाचार सच, देहरादून/रुद्रप्रयाग। वायु सेना के मालवाहक हेलीकॉप्टर चिनूक ने आज सुबह केदारनाथ में हेलीपैड में सुरक्षित लैंडिंगक की। बता दें कि बीते दिनों जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने केदारनाथ में हेलीपैड तैयार कर लिया था। इससे वहां पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाने को भारी मशीनें पहुंचाई जानी हैं। वायु सेना की टीम ने इस हेलीपैड का निरीक्षण किया था। केदारनाथ में दूसरे चरण के पुनर्निर्माण कार्य अक्टूबर से प्रस्तावित हैं। इसके लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं। पिछले दिनों मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने केदारनाथ में व्यवस्थाओं का जायजा लिया था और डीडीएमए को दस दिन के भीतर हेलीपैड तैयार करने के निर्देश दिए थे। वर्ष 2015 में एमआइ-26 हेलीकॉप्टर उतारने के लिए बने हेलीपैड का विस्तार कर यह हेलीपैड तैयार किया गया है। इसके लिए हेलीपैड के एक हिस्से से गढ़वाल मंडल विकास निगम के 45 कॉटेज हटाए गए। हेलीपैड के लिए 50 मीटर चौड़ा व सौ मीटर लंबा प्लेटफार्म तैयार किया गया है। आज वायु सेना के मालवाहक हेलीकॉप्टर चिनूक ने केदारनाथ में निर्मित हेलीपैड में सुरक्षित लैंडिंक की।
‘सीएच-47 एफ (आई) चिनूक एक उन्नत मल्टी-मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय सशस्त्र बलों को लड़ाकू और मानवीय मिशनों के पूरे स्पेक्ट्रम में बेजोड़ सामरिक एयरलिफ्ट क्षमता प्रदान करेगा।’ सितंबर 2015 में भारत के बोइंग और अमेरिकी सरकार के बीच 15 चिनूक हेलीकॉप्टर्स खरीदने के लिए करार किया गया था। अगस्त 2017 में रक्षा मंत्रालय ने बड़ा फैसला लेते हुए भारतीय सेना के लिए अमेरिकी कंपनी बोइंग से 4168 करोड़ रुपये की लागत से छह अपाचे लड़ाकू हेलीकॉप्टर, 15 चिनूक भारी मालवाहक हेलीकॉप्टर अन्य हथियार प्रणाली खरीदने के लिए मंजूरी प्रदान की थी।
इसकी खासियत है तेज गति
पहले चिनूक ने 1962 में उड़ान भरी थी। यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है।
चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी सेना की खास ताकत है। इसी चिनूक हेलीकॉप्टर की मदद से अमेरिकी कमांडो ने पाकिस्तान में घुसकर ओसामा बिन लादेन को मारा था। वियतनाम से लेकर इराक के युद्धों तक शामिल चिनूक दो रोटर वाला हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर है।
भारत ने जिस चिनूक को खरीदा है, उसका नाम है ब्भ्-47 एफ है।
यह 9.6 टन वजन उठा सकता है, जिससे भारी मशीनरी, तोप और बख्तरबंद गाड़ियां लाने-ले जाने में सक्षम है।
यह एक मल्टीमिशन श्रेणी का हेलीकॉप्टर है।
इससे पहले अमेरिका के फिलाडेल्फिया में बोइंग ने इसी हफ्ते भारत को पहले चिनूक हेलिकॉप्टर की खेप आधिकारिक रूप से सौंप दी थी।
डील के मुताबिक, इस साल के अंत तक भारत को सभी अपाचे और चिनूक हेलिकॉप्टर मिल जाएंगे। इससे वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा होगा।
बोइंग के मुताबिक, अपाचे दुनिया के सबसे अच्छे लड़ाकू हेलिकॉप्टर माने जाते हैं। वहीं, चिनूक हेलिकॉप्टर बहुत ऊंचाई पर उड़ान भरने में सक्षम है।
चिनूक भारी-भरकम सामान को भी काफी ऊंचाई पर आसानी से पहुंचा सकता है। अमेरिकी सेना लंबे वक्त से अपाचे और चिनूक का इस्तेमाल कर रही है।
भारत अपाचे का इस्तेमाल करने वाला 14वां और चिनूक को इस्तेमाल करने वाला 19वां देश होगा।
बोइंग ने 2018 में वायुसेना के पायलटों और फ्लाइट इंजीनियरों को चिनूक हेलिकॉप्टर उड़ाने की ट्रेनिंग भी दी थी।
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