समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष के दौरान चौथ का श्राद्ध (चतुर्थी श्राद्ध) उन पूर्वजों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए अर्पित किया जाता है, जिनका देहावसान किसी भी माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ…


समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष के दौरान चौथ का श्राद्ध (चतुर्थी श्राद्ध) उन पूर्वजों की आत्मशांति और तृप्ति के लिए अर्पित किया जाता है, जिनका देहावसान किसी भी माह के कृष्ण या शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को हुआ…

समाचार सच | अध्यात्म डेस्क। आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि है। मंगलवार को तृतीया पार्वण तिथि का श्राद्ध किया जाएगा। अश्विनी नक्षत्र सुबह 9:03 बजे तक रहेगा, इसके बाद भरणी नक्षत्र शुरू होगा। आज कई राशियों…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। सनातन परंपरा में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का समय माना जाता है। इस अवधि में लोग अपने पितरों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृ पक्ष में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए श्राद्ध, तर्पण और दान-पुण्य के साथ दीपक जलाने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पितरों के नाम का दीपक जलाकर उनका स्मरण और…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितृपक्ष में हर तिथि का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व होता है। वर्ष 2026 में द्वितीया तिथि का श्राद्ध (दूज श्राद्ध) 28 सितंबर 2026 (सोमवार) को रखा जाएगा। यह दिन उन पूर्वजों और परिजनों को समर्पित है,…

महालयारम्भ का अर्थ है महालय (पितृ पक्ष) की शुरुआत होना। हिंदू पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि (या भाद्रपद पूर्णिमा) से जब पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का प्रारंभ होता है, तो शास्त्रों में उसे ही…

समाचार सच | अध्यात्म डेस्क। आज आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और रविवार के दिन से महालय आरंभ हो रहा है। इसके साथ ही पितरों को समर्पित 16 दिवसीय पार्वण श्राद्ध पर्व की शुरुआत मानी जाती है। यह…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। पितरों को याद करने और उनके निमित्त श्राद्ध करने का समय जल्द शुरू होने वाला है। साल 2026 में पितृ पक्ष सितंबर के आखिरी दिनों से शुरू होगा और अक्टूबर में इसका समापन होगा। इस बार…

समाचार सच, अध्यात्म डेस्क। हे तार्क्ष्य (गरुड़)! अपने स्वयं के हाथों से किया गया दान, वह चाहे थोड़ा-सा ही क्यों न हो, अक्षय होता है। उसका पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। यह नियम जीवित व्यक्ति पर लागू होता है, मरने…