हार्माेन में आए असंतुलन का असर हमारी सेहत में किस तरह से पड़ता है, तो अपनाएं ये आसान टिप्स, झट से दूर होगी समस्या

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समाचार सच, स्वास्थ्य डेस्क। हार्माेन के असंतुलन से लगभग हर महिला जूझती है। इससे छुटकारे के लिए प्राकृतिक तरीकों को आजमाया जा सकता है। प्राकृतिक तरीके से कैसे हार्माेन्स को रखें संतुलित, बता रहे हैं डॉ. श्रीविद्या नंदकुमार। एक महिला अपनी पूरी जिंदगी में तमाम बदलावों से गुजरती है। इन बदलावों के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होते हैं, हार्माेन्स। हार्माेन्स में आए इस असंतुलन का असर हमारी सेहत से लेकर बाल और त्वचा तक पर नजर आता है। मूड में बदलाव, रोशनी के लिए संवेदनशीलता, तैलीय त्वचा और बाल, कुछ खाने का मन नहीं करना, नींद न आना, चिंता, तनाव और चिड़चिड़ापन ये सब हार्माेनल बदलावों के संकेत हो सकते हैं। गर्भावस्था, पीरियड और मेनोपॉज के दौरान हार्माेन का यह संतुलन ज्यादा बिगड़ता है। लेकिन यह केवल एक विशेष उम्र तक सीमित नहीं रहा है। अब तो व्यस्त दिनचर्या और तनावभरी जीवनशैली के चलते यह समस्या कम उम्र में ही महिलाओं में खूब देखी जाती है। हार्माेन के इस असंतुलन को सामान्य करना मुश्किल नहीं है। खास बात यह है कि आप यह काम प्राकृतिक उपायों की मदद से भी कर सकती हैं। इसका फायदा यह है कि इस तरह से आपकी सेहत कई तरह के साइड इफेक्ट्स से भी बची रहती है।

अलसी के बीज का करें सेवन-
अलसी के बीज अच्छी सेहत के लिए बहुत उपयोगी साबित होते हैं। इनमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड आदि पर्याप्त मात्रा में होते हैं। अलसी का बीज ब्लड शुगर को सामान्य रखने और दिल को सेहतमंद रखने में मदद करते हैं। विभिन्न अध्ययनों से यह स्पष्ट हो गया है कि जो महिलाएं नियमित रूप से अलसी के बीज का सेवन करती हैं, उनके शरीर में प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजन हार्माेन का स्तर संतुलित रहता है। अलसी के बीज को पीसकर उसके पाउडर को आप तरह-तरह से अपने आहार का हिस्सा बना सकती हैं।

सावधानी से करें पेय पदार्थों का सेवन-
शराब, कैफीन और चीनी युक्त पेय पदार्थ हमारे शरीर में हामोर्न का संतुलन बिगाड़ सकते हैं, क्योंकि इनसे कॉर्टिसोल हार्माेन का उत्पादन बढ़ता है, जिसका असर अंडाशयों की कार्य प्रणाली पर पड़ता है। अगर आपको प्यास लगे, तो सादा पानी या नारियल पानी पिएं। अगर आप एनर्जी चाहती हैं तो ग्रीन टी पिएं। इसमें कैफीन की सही मात्रा और एमिनो एसिड एल-थिएनिन होता है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को चुस्त बनाता है।

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तनाव का करें बेहतर प्रबंधन-
तनाव का असर हमारी जिंदगी पर चौतरफा पड़ता है। अकसर हम तनाव में अपने स्वास्थ्य की अनदेखी करते हैं, प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन करने लगते हैं और नींद पूरी नहीं करते। तनाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्माेन ज्यादा बनता है, जिससे थकान होती है। ऐसा होने पर शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है और आपका हॉमोर्नल संतुलन बिगड़ने लगता है। तनाव को दूर करने के लिए गुनगुने पानी से नहाएं, सैर करें और योगासन करें।

सोच-समझकर चुनें डेयरी उत्पाद-
डेयरी उत्पाद पोषक तत्वों का खजाना है। पर, अगर आप हार्माेन असंतुलन के दौर से गुजर रही हैं, तो आपको डेयरी उत्पाद, खासतौर पर दही और क्रीम के सेवन से पहले दो बार सोचना चाहिए। एक अध्ययन से पता चला है कि डेयरी उत्पादों के सेवन से कुछ विशेष हामोर्नों का स्तर कम हो जाता है।

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हर्ब्स भी हैं असरदार –
विटामिन-सी, बी-5, इल्युथेरो और रोडिओला ऐसे हर्ब्स हैं, जो एनर्जी देते हैं। ये न्यूरोट्रांसमीटर्स को सपोर्ट करते हैं और तनाव दूर करने वाले हामोर्न का स्राव बढ़ाते हैं। ये शरीर में हार्माेन का प्राकृतिक संतुलन बनाने में मदद करते हैं। मैका एक और शक्तिशाली बूटी है, जो मेनोपॉज के लक्षणों से राहत देती है। इसके सेवन से रात में पसीना आना या अचानक गर्मी लगने जैसी समस्याओं से राहत मिलती है। यह सेहतमंद लिपिड को बढ़ाने में मदद करती है। मैका पाउडर को अपनी ग्रीन टी में मिलाकर पिएं और हॉमोर्न्स को प्राकृतिक रूप से संतुलित बनाएं।

योग व व्यायाम आएंगे काम-
नियमित रूप से योगासन व व्यायाम करने के फायदों को नकारा नहीं जा सकता। इससे शरीर में रक्तसंचार बेहतर होता है, खुश रहने वाले हार्माेन एंडोर्फिन का स्राव बढ़ता है, शरीर का वजन सामान्य बना रहता है और दिल का स्वास्थ्य भी ठीक रहता है। व्यायाम एक व्यक्ति के लिए प्राकृतिक दवा है। इससे शरीर में कोर्टिसोल हार्माेन की मात्रा कम होती है और तनाव दूर करने में मदद मिलती है। सप्ताह में कम से कम 150 मिनट के लिए हल्का एरोबिक व्यायाम जरूर करें।

नींद पूरी लें-
जब हम सो रहे होते हैं तो दिमाग शरीर को डिटॉक्सिफाई करता है, इसलिए रोजाना कम से कम आठ घंटे की नींद जरूर लें। इससे शरीर में कोर्टिसोल, मेलाटोनिन, सोमाट्रोपिन जैसे हार्माेन संतुलित रहते हैं। हमेशा अंधेरे कमरे में सोएं, जहां फोन, लैपटॉप या टीवी स्क्रीन की नीली रोशनी न हो। (साभार: सीनियर नैचुरोपैथ हैं)

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